सुंदरबन में बाघों की गिनती पूरी

यानी दुनिया में का सबसे बड़ा घर। वहाँ बाघों की गिनती का काम पूरा हो गया है। खास बात यह है कि इस बार यह गिनती पदचिन्हों के अलावा डीएनए परीक्षण के जरिए भी की गई है।


बांग्लादेश की सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में में इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते टकराव और बाघों की तादाद पर विवाद के बीच यहाँ नए तरीके से बाघों की गिनती का काम अब पूरा हो गया है। इन नतीजों का विश्लेषण देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट और कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान मिल कर करेंगे।

इससे पहले हुई गिनती में यहाँ बाघों की तादाद 260 से 280 के बीच बताई गई थी। लेकिन भारतीय सांख्यिकी संस्थान ने गिनती का तरीका सही नहीं होने की बात कह कर वन विभाग के दावे पर सवाल खड़ा कर दिया था। इसलिए इस बार गिनती के लिए पदचिन्हों के पारंपरिक तरीके के अलावा बाघों के डीएनए परीक्षण का भी सहारा लिया गया है।

सुंदरबन टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सुब्रत मुखर्जी कहते हैं कि बाघों की तादाद कम नहीं है। सही तादाद तो आँकड़ों के विश्लेषण के बाद ही सामने आएगी। लेकिन पिछली गिनती को पैमाना मानें तो उनकी तादाद उससे कम नहीं होगी।


हाल के दिनों में बाघों के जंगल से मानव बस्तियों में आने की घटनाएँ बढ़ी हैं। सुंदरबन में बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उनको रेडियो कॉलर भी पहनाए जा रहे हैं। वन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि रेडियो कालर से बाघों की गतिविधियों की पूरी जानकारी मिलती रहेगी। यह रेडियो कॉलर सेटेलाइट से जुड़ा है।
सुंदरबन बायोस्फेयर रिजर्व के निदेशक प्रदीप व्यास नहीं मानते कि जंगल में बाघों के भोजन में कमी आई है। वह कहते हैं कि सुंदरबन में बाघों के लिए शिकार की कोई कमी नहीं है। व्यास बताते हैं कि पाँच दिनों तक चली इस गिनती के लिए वन विभाग के ढाई सौ कर्मचारियों और कुछ गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर 35 टीमों का गठन किया गया था।
वन विभाग ने मानव बस्तियों में बाघों का प्रवेश रोकने के लिए जंगल से सटी बस्तियों में जाल लगाने के अलावा स्थानीय लोगों को साथ लेकर वन रक्षक समितियाँ गठित की हैं। लोगों से जंगल के पेड़ों की कटाई से बचने को कहा गया है।

आखिर सुंदरबन में कितने बचे हैं? इस सवाल का सही जवाब तो बाघों के मल के नमूनों के डीएनए विश्लेषण से ही मिलेगा। लेकिन इस काम में अभी समय लगेगा। इसलिए नतीजे सामने नहीं आने तक तो इस बारे में अनुमान ही लगाया जा सकता है।
- प्रभाकर, कोलकाता



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