अब कोई भी सिलेक्ट हो जाता है, सुनील गावस्कर ने टीम चयन पर ऐसा क्यों कहा?
भारतीय क्रिकेट में काम का बोझ संभालने पर बहस को फिर से हवा देते हुए, भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने खिलाड़ियों को रोटेट करने बारी-बारी से खिलाने पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की बढ़ती निर्भरता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि बहुत ज़्यादा बदलाव करने से देश का प्रतिनिधित्व करने की अहमियत कम हो रही है।
आयरलैंड के खिलाफ टी 20 सीरीज़ शुरू होने वाली है और इंटरनेशनल क्रिकेट का कार्यक्रम बहुत व्यस्त है। ऐसे में गावस्कर का कहना है कि टीम में लगातार बदलाव करने से भारतीय टीम में खेलने का मौका पाने का सम्मान कम हो सकता है, भले ही टीम के पास टैलेंट की कोई कमी न हो।
उन्होंने कहा कि हालांकि आज के क्रिकेट में कार्यभार प्रबंधनज़रूरी हो गया है, लेकिन यह उस हद तक नहीं जाना चाहिए जहां चयन का महत्व ही खत्म हो जाए। उन्होंने कहा, “पदार्पण हासिल किया जानाचाहिए, न कि सिर्फ़ इसलिए मौका मिलना चाहिए कि किसी स्थाई खिलाड़ी को आराम दिया जा रहा है।” उन्होंने एक पारदर्शी प्रणाली बनाने की मांग की ताकि वरिष्ठ खिलाड़ियों का इस्तेमाल बेतरतीब ढंग से न हो-यानी न तो ज़रूरत से ज़्यादा और न ही बहुत कम।
गावस्कर ने यह भी सुझाव दिया कि वरिष्ठ क्रिकेटरों को हर साल कम से कम एक महीने का आराम मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि बिना ठीक से आराम किए अलग-अलग प्रारुप में लगातार क्रिकेट खेलने से चोट लगने, थकान और लंबे समय में प्रदर्शन गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
उनकी ये बातें अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की हालिया घरेलू सीरीज़ के संदर्भ में आई हैं, जहां शुभमन गिल की कप्तानी में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और केएल राहुल जैसे शीर्ष क्रम बल्लेबाजों ने शतक भी लगाए। साथ ही, वरिष्ठ तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह को आराम देने के फैसले ने लगातार बदलाव की नीति पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
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