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हाथी भैया का ब्याह‌

हाथी पर कविता
चूहे के छोटे से बिल में,
चार-चार हाथी घुस आए।
डर के मारे बिल के सारे,
चूहे बहुत-बहुत घबराए।

तब चूहों के 'मुखिया दादा',
सभी हाथियों पर चिल्लाए।
'बहू बेटियों वाले घर में,
बिना इजाजत क्यों घुस आए?'

हाथी बोले, बहू बेटियों,
को हम ढेरों तोहफे लाए।
बचा एक कुंवारा हाथी है,
दुल्हन, उसे ढूढ़ने आए।

इसी बात पर चूहे दादा,
हुए मुदित, मन में मुस्काए।
प्यारी बिटिया मिस चुहिया को,
सजा धजा कर बाहर लाए।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें