- लाइफ स्टाइल
» - नन्ही दुनिया
» - कविता
लाल बनेंगे
आठ बजे हम पढ़ने बैठे बारह बजा कभी का लेकिन जितना काम मिला था पूरा हुआ कभी का हम सब सात-आठ साथी हैं कक्षा दो में पढ़ते साथ खेलते, बड़े मेल से कभी नहीं, हम लड़ते लाल बनेंगे हम भारत के करना है कुछ ऐसा नाम हमारा भी चमकेगा सूरज चंदा जैसा।