महेश गनोकर (Mahesh Ganorkar), जिन्हें "मैक्स" (Max) के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय-अमेरिकी राजनीतिज्ञ हैं, जो 37 साल से भी अधिक समय से अमेरिका में रह रहे हैं। वे अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना (North Carolina) राज्य के चौथे कांग्रेस निर्वाचन क्षेत्र (4th Congressional District) से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (U.S. House of Representatives) के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
1. राजनीतिक दल और चुनाव (2026)
पार्टी: वे रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) के उम्मीदवार हैं।
मौजूदा स्थिति: वे 3 नवंबर, 2026 को होने वाले आम चुनाव (General Election) के लिए मैदान में हैं। उनके रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव में वे निर्विरोध आगे बढ़े थे।
मुकाबला: उनका मुख्य मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की वर्तमान सांसद वैलेरी फौशी (Valerie Foushee) से है।
2. प्रमुख राजनीतिक विचार और मुद्दे
महेश गनोकर 'खुली लेकिन परंपरावादी" विचारधारा रखते हैं। उनके अभियान के मुख्य मुद्दे निम्नलिखित हैं:-
कराधान (Taxation): वे 16वें संशोधन (Repeal the 16th Amendment) को निरस्त करने और आयकर को समाप्त करने के समर्थक हैं। आयकर की जगह नेशनल सेल्स टैक्स लागु करने से हर नागरीक अपने सामर्थ्य के अनुसार योगदान कर सकते हैं और सरकार के अत्यधिक खर्चों पर रोक लगाने की भी मांग की है।
समाजवाद का विरोध: वे अक्सर कहते हैं, "समाजवाद बेकार है, मैं इसमें रहा हूँ" (Socialism sucks, I lived it)। वे अमेरिका को उस समाजवादी व्यवस्था की ओर जाने से रोकना चाहते हैं जिसे उन्होंने भारत में देखा था।
सीमा सुरक्षा: वे खुली सीमाओं के सख्त खिलाफ हैं और अवैध आप्रवास को रोकने के लिए कड़े कानूनों का समर्थन करते हैं।
चुनाव सुधार: वे मेल-इन वोटिंग को समाप्त करने और चुनाव सुरक्षा को मजबूत करने की वकालत करते हैं।
3. पिछले प्रयास
उन्होंने 2022 में नॉर्थ कैरोलिना के दूसरे डिस्ट्रिक्ट से और 2024 में चौथे डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन प्राइमरी में चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिली थी। 2026 के लिए वे अब मुख्य चुनाव (General Election) में अपनी पार्टी के आधिकारिक चेहरा हैं।
गनोकर का कहना है कि वे अमेरिकी संविधान को बहाल करने और "स्वतंत्रता की भूमि" (Land of the Free) के लिए लड़ रहे हैं, न कि मुफ्त की सुविधाओं (freebies) के लिए। जब मुफ्तखोरों की संख्या अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाती है तो देश की अर्थव्यवस्ता धराशायी हो जाती है. और चूँकि हिन्दू आज अमेरिका के सबसे समृद्ध गुटों में आते इसके कारण उन्हें और उनकी कर्मनिष्ठ संतानों पर इसका भार आनेवाला है।
4. व्यक्तिगत और व्यावसायिक पृष्ठभूमि
शिक्षा: उन्होंने एमबीए (M.B.A.) की डिग्री हासिल की है।
करियर: राजनीति में आने से पहले उन्होंने अमेरिका और भारतीय कंपनियों के बीच संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) पर काम किया और घरों को डिजाइन करने का व्यवसाय भी किया।
इंदौर से संबंध: महेश मूलत: इंदौर के रहने वाले हैं और उनका पैतृक गांव दर्यापुर, महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित है। वे वहां के प्रतिष्ठित जमींदार परिवार के वंशज हैं। अमेरिका जाने के पहले, 14 साल से आयु तक वहां पर खेती बाड़ी का काम किया था।
पारिवारिक निर्णय: गनोकर ने बताया है कि अपने पहले बच्चे के जन्म के बाद, उन्होंने अपने करियर को विराम दिया और एक 'स्टे-एट-होम डैड' (Stay-at-home dad) बनने का फैसला किया ताकि वे अपने बच्चों की परवरिश और होम-स्कूलिंग कर सकें। इसके लिए उन्हें परिवार और रिश्तेदारों के ताने सुनने पड़े लेकिन उनकी मां ने उनका साथ दिया। उन्होंने 1995 में भारतीय मूल की मॉरेशियस महिला से विवाह किया, जिसके बाद उन्होंने तीन बच्चों का ध्यान रखने के लिए नौकरी छोड़ दी। बच्चे बड़े होने के बाद उन्होंने कंस्ट्रक्शन का बिज़नेस शुरू किया है. गनोकर कहते हैं कि उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश भारतीय परंपरा के अनुसार की। उनके बच्चे हर सुबह घर से बाहर जाने के पहले पूजा करते हैं। उनकी शादी को 32 साल हो गएँ है और तब से हर माह की पूर्णिमा पर हमारे उनके यहां पर सत्यनारायण भगवान की कथा की जाती है।
5. हिंदू धर्म और भारतीयों के प्रति अमेरीकियों की सोच:
गीता और गनोकर: गनोकरजी से मुलाकात के दौरान उन्होंने संक्रत के श्लोकों के अंग्रेजी अनुवाद की एक बहुत ही पुरानी गीता हमें दिखाई और कहा कि जब भी में उदाय होता हूं या किसी संकट में पड़ जाता हूं तो में अपनी इस गीता के पन्ने पलटता हूं और मुझे मेरी समस्या या परेशानी का उत्तर मिल जाता है। मैंने हर परेशानी में उसमें उत्तर ढूंढा है। इसके पन्ने पन्ने अलग हो गए- मैं चाहता हूँ कि लोग गीता की तरफ चलें।
गनोकर और हिंदू धर्म:
हाल ही में इंदौर आए गनोकर ने कहा कि अमेरीकियों के मन में भारतीयों और हिंदू धर्म के प्रति कई तरह की भ्रांतियां हैं। वे हिंदू धर्म के कास्ट सिस्टम, 33 करोड़ देवी एवं देवता, सती प्रथा आदि को लेकर मजाक उड़ाते हैं। इसी के साथ ही अमेरिका के लोगों में और भी कई तरह की भ्रांतियां हैं। इन्हीं सभी भ्रांतियों का जवाब देने और अमेरिका में गुजारे अपने दिनों और अनुभवों को लेकर वे एक किताब लिख रहे हैं।
इससे पहले महेश गनोकर ने हिंदू धर्म और अमेरिका में हिंदू समुदाय की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण किताब लिखी है, जिसका शीर्षक है: "In Defense of My Faith: In Defense of My HINDU Faith"
यह किताब जनवरी 2024 में प्रकाशित हुई थी (जिसे उन्होंने 2026 के चुनावी अभियान के दौरान भी प्रमुखता से प्रचारित किया है)। इस पुस्तक के माध्यम से गनोकर ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाया है।
किताब के मुख्य विषय:
हिंदू धर्म के प्रति गलतफहमियां: गनोकर का मानना है कि अमेरिका में हिंदू धर्म को लेकर कई भ्रांतियां और झूठ फैलाए गए हैं। इस किताब के जरिए उन्होंने उन दावों को चुनौती दी है जो हिंदू धर्म को कमतर या गलत तरीके से दिखाते हैं।
राजनीति में धर्म का अनुभव: उन्होंने अपनी किताब में साझा किया है कि 2022 के चुनाव के दौरान उन्हें रिपब्लिकन प्राइमरी में केवल इसलिए चुनौतियों और अपमान का सामना करना पड़ा क्योंकि वे ईसाई नहीं बल्कि हिंदू थे। वे बताते हैं कि कैसे मतदाताओं ने उनकी नीतियों को तो पसंद किया, लेकिन उनके धर्म के कारण उन्हें स्वीकार करने में हिचकिचाए।
अमेरिका में अधिकांश हिंदू डेमोक्रेट पार्टी की ओर आकर्षित हुए हैं, क्योंकि यह पार्टी स्वयं को सहिष्णु और हिंदुओं को स्वीकार करने वाली बताती है। लेकिन इसकी समाजवादी नीतियों का समर्थन करते हुए, कई लोग वही गलतियाँ दोहराने का जोखिम उठा रहे हैं, जिन्होंने कभी उन्हें भारत से दूर जाने पर मजबूर किया था। क्योंकि यदि अमेरिका भी समाजवादी भारत जैसा बन गया, तो हमारे बच्चों के पास जाने के लिए कहाँ स्थान बचेगा? इसी कारण, गनोकर स्वयं को कभी-कभी हिंदू समुदाय के भीतर अकेला पातें हैं, लेकिन बेझिझक अमेरिका में हिंदुओं के सम्मान, प्रतिष्ठा और स्वीकृति के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अमेरिका में हिंदुओं का योगदान: पुस्तक में उन्होंने सांख्यिकीय डेटा (statistical data) का उपयोग करते हुए यह दिखाया है कि अमेरिका में रहने वाले हिंदू सबसे अधिक शिक्षित, समृद्ध और कानून का पालन करने वाले नागरिकों में से एक हैं। वे तर्क देते हैं कि अगर हिंदू धर्म "बुरा" होता, तो यह समुदाय इतने सकारात्मक परिणाम नहीं दे पाता।
सांस्कृतिक पुल बनाना: गनोकर के अनुसार, यह किताब न केवल हिंदुओं के लिए है, बल्कि उन अमेरिकियों के लिए भी है जो हिंदू संस्कृति को नहीं समझते। यह संवाद और समझ का एक सेतु (bridge) बनाने का प्रयास है।
यह किताब गनोकर के राजनीतिक और व्यक्तिगत संघर्षों का एक दस्तावेज है, जहाँ वे गर्व के साथ अपनी हिंदू पहचान को अमेरिकी संवैधानिक मूल्यों के साथ जोड़कर पेश करते हैं। उनका मुख्य संदेश है कि एक सच्चा हिंदू होना और एक कट्टर अमेरिकी देशभक्त होना दोनों साथ-साथ संभव हैं। उनकी वेबसाइट www.MaxForCongress.com है।
रिपोर्ट: अनिरुद्ध जोशी