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ये है बदरंग चेहरा
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जितेंद्र वेद काला बोर्डलाल-पीले, सफेद चाकगणित, अँग्रेजी की लाल-काली किताबेंउनमें हाथी बराबर छिपे हैं काले अक्षरऔर मुरझाए पीले पड़े बच्चों के चेहरेबच्चे चुप हैंक्योंकि उन्हें मास्टर का चेहरा सता रहा है।मास्टर चुप है।क्योंकि उन्हें पाठ्यक्रम सता रहा है। शब्द आँकड़े खुद तो चुप हैपर वे बच्चों और मास्टर को आँख दिखा रहे हैंअभिमन्यु फँस गए हैंकिताबों, स्कूल, मास्टर के चक्रव्यूह मेंऔर काले बोर्ड पर लिखे अक्षरधुँधले होते जा रहे हैंस्याह रात में धूमतीबिल्लियों की तरह दिखताये ही है, देश का बदरंग चेहरा