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Written By WD

नया साल : खिले रहें हम...

नया साल
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तन से, मन से उजले हों सब
लगें सभी के रूप अनूप।

संस्कार का नया उजाला
घर-आंगन में छाए,

फूलों जैसे खिले रहें हम
गंध फैलती जाए।

सुख-दुःख के आकार नए हों,
मन को भाए, नवल स्वरूप

- डॉ. तारादत्त 'निर्विरोध'
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