Happy new Year 2013 | नया साल : खिले रहें हम...
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तन से, मन से उजले हों सब
लगें सभी के रूप अनूप।
संस्कार का नया उजाला
घर-आंगन में छाए,
फूलों जैसे खिले रहें हम
गंध फैलती जाए।
सुख-दुःख के आकार नए हों,
मन को भाए, नवल स्वरूप।
- डॉ. तारादत्त 'निर्विरोध'
