FILE तन से, मन से उजले हों सबलगें सभी के रूप अनूप।संस्कार का नया उजालाघर-आंगन में छाए,फूलों जैसे खिले रहें हमगंध फैलती जाए।सुख-दुःख के आकार नए हों,मन को भाए, नवल स्वरूप।- डॉ. तारादत्त निर्विरोध...