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चुहिया और संपादक‌

बाल कविता
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चुहिया रानी रोज डाक से,
कविताएं भिजवाती।
संपादक हाथी साहब को,
कभी नहीं मिल पातीं।

एक दिन चुहिया सुबह सुबह ही,
हाथी पर चिल्लाई।
बाल पत्रिका में मैं अब तक,
कभी नहीं छप पाई।

तब हाथी ने मोबाइल पर,
चुहिया को समझाया।
क्यों न, मिस, अब तक तुमने,
अपना ई-मेल‌ मेल बनाया?

अगर मेल पर अपनी,
रचनाएं मुझको भिजवातीं।
तो मिस चुहिया निश्चित ही,
तुम कई बार छप जातीं।
लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें