FILE दो-दो फुट दिन में जुड़वा दें,दो फुट की बढ़वा दें रात।किसी तरह से क्यों न बापू,बड़े-बड़े कर दें दिन-रात।छोटे-छोटे दिन होते हैं,छोटी-छोटी होती रात।ना हम चंदा से मिल पाते,ना सूरज से होती बात।नहीं जान पाते हैं अम्मा, क्या होती तारों की जात।ना ही हमें पता लग पाता,अंबर की कितनी...