एक बार एक सरदारजी अपने छोटे पुत्र को लेकर बाजार जा रहे थे। बाजार में उनके पुत्र ने कहा- 'पापा, पापा! केले लीजिए ना!' तब सरदारजी ने कहा- 'अरे बेटे! ये कोई केले हैं, यह तो केली है, केली। केले तो अपने पंजाब में होते हैं, मोटे-मोटे, ताजे'
वे आगे चल दिए। आगे उनके पुत्र ने तरबूज खरीदने की जिद की। इस पर सरदारजी ने कहा- 'ये कोई तरबूज हैं, यह तो तरबूजी है, तरबूजी। तरबूज तो अपने पंजाब में होते हैं-मोटे-मोटे, ताजे'।
अब वे घर पहुँचे। उनके घर पहुँचते ही उनके बड़े पुत्र ने पूछा- 'पापा! आप हमारे लिए क्या लाए?' इस पर उनके छोटे पुत्र ने कहा- 'अरे! यह कोई पापा हैं, यह तो पापी है, पापा तो अपने पंजाब में हैं, मोटे-मोटे, ताजे।
हॉर्न एक सेठजी कार में सफर कर रहे थे कि अचानक ड्रायवर ने ब्रेक लगा दिया। सेठजी चिल्लाए- 'यह क्या कर रहे हो?' ड्रायवर-'साहब, एक पत्थर आ गया था।' सेठजी- 'बेवकूफ! तुमने हॉर्न क्यों नहीं बजाया?'
खरीददार 'इस भैंस की तो एक आँख खराब है, फिर सात हजार रुपए क्यों माँग रहे हो?' खरीददार ने कहा। 'आपको भैंस से दूध लेना है या कशीदाकारी करवानी है।' भैंस विक्रेता ने जवाब दिया।
डाकू व यात्री डाकू- 'तुम्हारे पास जो कुछ भी है, मेरे हवाले कर दो।' यात्री- 'धीरे बोलो, कहीं टी.टी. न सुन ले। मेरे पास तो टिकट भी नहीं है।'