खाटू धाम में कैसे प्रकट हुआ बाबा श्याम का शीश? जानिए चमत्कारी कथा
khatu shyam mandir history in hindi: भारत में खाटू श्याम बाबा के कई महत्वपूर्ण मंदिर हैं, जिनमें से राजस्थान के सीकर जिले का मंदिर सबसे प्रमुख और मूल माना जाता है क्योंकि यहां पर श्याम बाबा का शीश प्रकट हुआ था। यहां बर्बरीक (श्याम बाबा) का शीश स्थापित है। चलिए जानते हैं शीश प्रकट होने की प्रचलित कथा।
श्याम बाबा का शीश और धड़:
कहते हैं कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद खाटू श्याम के शीश और धड़ को अलग अलग नदियों में विसर्जित रख दिया गया था। पानी में बहती हुई धड़ तो हरियाणा के हिसार जिले के बीड़ गांव तक चला गया और शीश सीकर के खाटू नाम की जगह पर पहुंच गया।
खाटू धाम में भूमि से कैसे प्रकट हुआ शीश:
महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया था- कलियुग में तुम मेरे नाम श्याम से पूजे जाओगे। समय बीतने पर उनका शीश युद्धभूमि से एक स्थान पर लाया गया, जो आज का खाटू (राजस्थान) माना जाता है।
किंवदंती के अनुसार, एक दिन खाटू गांव में एक गाय उस स्थान पर रोज दूध गिराने लगी। जब गांववालों ने भूमि खोदी तो वहाँ से एक दिव्य शीश प्रकट हुआ। यह बात तत्कालीन शासक रूप सिंह चौहान तक पहुंची। रात में राजा को स्वप्न हुआ जिसमें स्वयं खाटू श्याम जी ने कहा- 'मैं बर्बरीक हूं, मेरा शीश यहां प्रकट हुआ है। मेरा विधिवत मंदिर बनवाओ।'
अगले दिन राजा ने उस स्थान पर विधि-विधान से पूजन कर मंदिर निर्माण करवाया। आज वही स्थल प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि उनका शीश राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में भूमि के अंदर प्रकट हुआ, जहाँ आज प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर स्थित है।
लोक परंपराओं के अनुसार-
शीश का प्राकट्य: लगभग मुगलकाल से पूर्व
वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार: 18वीं सदी में
फाल्गुन मेले की परंपरा: प्राचीन काल से चली आ रही
(यह विवरण धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है)