यह है श्री हनुमान जी को प्रसन्न करने की शास्त्रोक्त विधि और मंत्र

ध्‍यान 
 
हृदयादिन्यास करने के बाद निम्न मंत्र का पाठ करते हुए श्री हनुमानजी का ध्‍यान करें।
'वज्रांग पिंगकेशं कनक मलयसत्कुण्डलाकांतगंडं। नाना विद्याधिनार्थ करतल विधृतं पूर्ण कुंभं दृढ़ं च। भक्ता भीष्टाधिकारं विदधति त्रैलोक्य त्राणकारं सकल भुवगं रामदूतं नमामि।'
अर्थ- वज्र के समान शरीर, पीले सुनहरे बाल, स्वर्णमयकुण्डलों से शोभायमान, अनेक विद्याओं के ज्ञाता, भरे हुए जल-कलश को धारण करने वाले, तीनों लोकों की रक्षा करने वाले, सर्वव्यापक श्री रामदूत (हनुमानजी) को नमस्कार करता हूं।
 
उपरोक्त विधि से श्री हनुमानजी का ध्‍यान करें। पीड़ाहारी श्री हनुमान जी समस्त विघ्न बाधाओं का शमन करते हैं।
 
साधकजन प्रात:काल स्नानादि के पश्चात श्री हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, बजरंग वाण आदि का पाठ अवश्य करें। यह क्रिया प्रतिदिन संपन्न करें तो अति उत्तम है।
 
हनुमानजी के मंदिर पर जाकर पूजा-पाठ करके हनुमान चालीसा बांटें।



और भी पढ़ें :