why american economy is going down : संयुक्त राज्य अमेरिका, जिसे अक्सर 'दुनिया की महाशक्ति' कहा जाता है, आज कई ऐसी आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहा है जो उसकी बुनियाद को हिला रही हैं। ऊपर से दिखने वाली चमक के पीछे, एक ऐसा ढांचा है जो दरारों से भरा हुआ है। ये चुनौतियां सिर्फ आर्थिक नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक भी हैं, जिनकी अनदेखी आने वाले समय में अमेरिका को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकती है।
1. दुनिया का नंबर 1 कर्जदार देश अमेरिका
अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार देश है। इसका राष्ट्रीय ऋण लगातार बढ़ रहा है, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 120% से अधिक हो गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कर्ज हर दिन अरबों डॉलर की दर से बढ़ रहा है। यह कर्ज न केवल देश की आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल रहा है, बल्कि ब्याज भुगतान पर होने वाला भारी खर्च शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से धन खींच रहा है। यह स्थिति डॉलर की साख को भी कमजोर कर रही है, जिसकी चर्चा आगे की जाएगी।
2. विऔद्योगीकरण और डॉलर की गिरती साख
एक समय अमेरिका को दुनिया की 'मैन्युफैक्चरिंग हब' कहा जाता था, लेकिन पिछले कुछ दशकों में विऔद्योगीकरण (deindustrialization) ने देश के औद्योगिक आधार को कमजोर कर दिया है। उत्पादन इकाइयां कम लागत वाले देशों में चली गईं, जिससे लाखों नौकरियां चली गईं और मध्य-वर्ग पर भारी मार पड़ी।
इसी के साथ, वैश्विक मंच पर डॉलर की साख भी गिर रही है। कई देश, विशेषकर ब्रिक्स (BRICS) समूह के सदस्य, अपने व्यापार के लिए डॉलर के बजाय अपनी मुद्राओं का उपयोग करने पर जोर दे रहे हैं। अमेरिका द्वारा रूस जैसे देशों पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों ने भी अन्य देशों को डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया है। यदि डॉलर अपनी वैश्विक मुद्रा की स्थिति खो देता है, तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।
3. भटकी हुई पीढ़ी और सांस्कृतिक पतन
आज का अमेरिकी समाज कई आंतरिक संघर्षों से जूझ रहा है। एक तरफ मिलेट्री पर रिकॉर्ड तोड़ खर्च हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों के लिए बुनियादी सुविधाओं, जैसे सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा देखभाल, में कमी देखी जा रही है। देश का एक बड़ा हिस्सा युवाओं की एक भटकी हुई पीढ़ी से परेशान है, जो न केवल तकनीकी तौर पर अलग-थलग है, बल्कि सामाजिक मूल्यों के पतन का भी शिकार है। सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया का छल-कपट इस पीढ़ी को भ्रमित कर रहा है।
राजनीतिक लीपापोती का आलम यह है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा के बजाय, मीडिया और राजनेता अक्सर विभाजनकारी मुद्दों को हवा देते हैं, जिससे समाज में और भी दरारें पैदा होती हैं।
4. बुनियादी सुविधाओं का चरमराता ढांचा
एक विकसित देश की पहचान उसका मजबूत बुनियादी ढांचा होता है, लेकिन अमेरिका में सड़कें, पुल, हवाई अड्डे और सार्वजनिक परिवहन का ढांचा धीरे-धीरे बिगड़ रहा है। कई पुल और सड़कें अपनी निर्धारित जीवनकाल से बहुत पुराने हो चुके हैं। इस बिगड़ते ढांचे के रखरखाव और सुधार के लिए आवश्यक निवेश नहीं किया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है और आर्थिक विकास भी प्रभावित हो रहा है।
अमेरिका को अपनी विश्व शक्ति की स्थिति बनाए रखने के लिए इन चुनौतियों को गंभीरता से लेना होगा। कर्ज के बोझ को कम करना, घरेलू उद्योगों को पुनर्जीवित करना, सामाजिक सुरक्षा में सुधार करना और अपनी राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाना अनिवार्य है। यदि अमेरिका ने इन चुनौतियों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो पूरी संभावना है कि 'दुनिया की महाशक्ति' का ताज उसके सिर से उतr जाए और यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि विशुद्ध हकीकत है।