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थाईलैंड में इस्लामिक आतंकवादियों ने किया बम विस्फोट, एक मृत

Buddhist nation
बैंकॉक। बौद्ध देश थाईलैंड के मुस्लिम उग्रवाद प्रभावित दक्षिणी क्षेत्र में स्थित एक होटल के बाहर हुए भीषण कार बम विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जाती है।
File photo

यह इलाका पर्यटकों के बीच अधिक लोकप्रिय नहीं है, लेकिन इस माह की शुरूआत में उत्तर की ओर स्थित रिसोर्ट के लिए मशहूर शहरों में छोटे लेकिन समन्वित विस्फोट होने से यह चिंता बढ़ गई है कि दक्षिण के उग्रवाद का काफी समय से शांति वार्ताएं बंद रहने के कारण प्रसार तो नहीं हो रहा है।
 
थाईलैण्ड के तीन दक्षिणी प्रान्त-पट्टानी, याला और नरभीवाट- मुस्लिम बहुल क्षेत्र बन गऐ हैं जहां बौद्ध आबादी को लगभग खदेड़ दिया गया है। हालिया बम विस्फोट पट्टनी के बाहरी इलाके में स्थित एक होटल के बाहर आधी रात से पहले हुआ। पट्टनी तीन मुस्लिम बहुल दक्षिण प्रांतों में से एक है, जो 12 साल से उग्रवाद से ग्रस्त है। 
 
पट्टनी प्रांत के पुलिस कमांडर मेजर जनरल थानोंगसक वैंगसूपा ने कल एएफपी को कहा, ' विस्फोट में अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।'
 
उन्होंने कहा, 'होटल की इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है।' नाम न जाहिर करने की शर्त पर शहर के अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि 32 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से पांच की हालत गंभीर है। सभी थाईलैंड के ही निवासी हैं।

अधिकांश दूतावासों ने बौद्ध बहुल राज्य और मुस्लिम विद्रोहियों के बीच अधिक स्वायत्तता की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहे विद्राह के चलते अपने अपने देश के नागरिकों को पट्टनी की यात्रा करने को लेकर सचेत किया है। लगभग रोज गोलीबारी और सड़क के किनारे विस्फोट की घटनाओं में 2004 से अभी तक करीब 6500 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर नागरिक ही थे।
 
हिंसा में अक्सर स्थानीय लोग ही उग्रवादियों का शिकार बने हैं, लेकिन पश्चिमी पर्यटकों को निशाना बनाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसको लेकर नाराजगी जाहिर की जा रही है। देश का सैन्य नेतृत्व इस बात को दबाने की कोशिश करता रहा है कि शायद उग्रवाद फैल रहा है।
 
बहरहाल, पुलिस की इस माह की शुरुआत में की गई जांच दक्षिण की ओर इशारा कर रही है। थाईलैंड के शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि ऐसा माना जा रहा है कि अधिकतर विस्फोटों के पीछे दक्षिणी हिस्सों में रहने वाले मुसलमानों का हाथ है। विद्रोहियों ने कभी हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि दशकों से अधिक समय से चल रहे संघर्ष के बावजूद समुचित बदलाव न होने से इन गुटों में निराशा है। (भाषा)
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