दुनिया के 11 महान जादूगर, जानिए भारत के कितने....

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
मोहम्मद छैल ( mohammed chhel ) : यह एक था। गुजरात के भावनगर के पास के एक गांव में 1850 को इसका जन्म हुआ था। 75 वर्ष की उम्र में सन् 1925 को उसकी मृत्यु हो गई थी।
 
कहते हैं कि छैल को अपनी जादूगरी पर घमंड था। वह रेलवे में बिना टिकट यात्रा करता और टीटी से टिकट मांगे जाने पर हाथ की मुट्ठी को बंद कर खोलता और टिकट बना देता था। उसने अपनी जादू की विद्या का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया था।
 
मोहम्मद छैल ने प्राचीन भारत की कई विद्याएं सिद्ध कर रखी थी। जिस गुरु से उसने यह सीखा था उसने वचन दिया था कि आपकी सहायता से प्राप्त किसी भी चीज का मैं व्यक्तिगत उपयोग नहीं करूंगा। लेकिन उसने वचन को नहीं निभाया। छैल अपनी विद्या से मिठाइयों से भरा थाल उत्पन्न करता और अनेक मनुष्यों को मिठाई खिलाता था। धीरे-धीरे उसको उन विद्याओं में रस आने लगा और वह लोगों को सम्मोहित करने लगा। हालांकि छैल के बारे में अन्य कई और भी किस्से प्रचलित हैं। उसने लोगों के भले का काम भी किया था।
 
एक बार उसने अपने छल-कपट और जादूगरी से एक जैन सन्यासी के धार्मिक कार्य में बाधाएं डालना शुरू कर दी थी। कई बार चेताए जाने पर भी उसने सन्यासी को परेशान करना बंद नहीं किया तब अंत में सन्यासी ने उसकी जादूगरी को एक ही इशारे से धूल में मिला दिया। उसका जादू हमेशा के लिए नष्ट कर दिया। फिर कभी उसका जादू नहीं चला। भारत के ज्ञात इतिहास में पहला जादूगर उसे ही माना जाता है। हालांकि उससे पहले भी हजारों जादूगर हुए हैं लेकिन वे इतिहास के गर्त में खो गए। ज्यादातर को सड़क पर बताने वाले ही थे।
 
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