Satere Mawe Tribe: मर्दानगी साबित करने के लिए यहां लड़के हंसते-नाचते झेलते हैं जहरीली चींटियों का डंक, वर्ना नहीं हो पाती है शादी
अमेजन की साटेरे-मावा ट्राइब्स के लड़कों को मर्दानगी साबित करने के लिए गुजरना होता है इस दर्दनाक टेस्ट से
Satere Mawe Tribe
What is Bullet Ant Ritual: ये दुनिया विचित्रताओं से भरपूर है। और इसे और विचित्र बनाते हैं हम इंसानों के बनाए अफलातूनी रिवाज। आज भी दुनिया में कुछ ऐसी जनजातियां हैं जिनकी अजीबो गरीब प्रथाएं आपको हैरत में डाल देंगी। इस आलेख में हम आपको ब्राजील की एक ऐसी जनजाति के बारे में बता रहे हैं जहां लड़के खुद को चींटियों से कटवाने के बाद ही मर्द बन पाते हैं।
- अमेजन की साटेरे-मावा ट्राइब्स के लड़कों को अपनी मर्दानगी साबित करने के लिए इस दर्दनाक टेस्ट से गुजरना पड़ता है।
- इस टेस्ट को पास किए बिना, नहीं हो सकती है शादी।
- ये प्रथा खास तौर पर पुरुषों के लिए है।
ये बात सुनने में हमारे लिए अजीब हो सकती है लेकिन अमेजन के जंगलों में रहने वाली यह जनजाति सदियों से इस परंपरा को निभाती आ रही है। अमेजन के साटेरे-मावा जनजाति के लड़कों को अपनी मर्दानगी को साबित करने और खुद को वयस्क साबित करने के लिए इस अजीबोगरीब ट्रेडिशन से गुजरना पड़ता है। इस तरह पूरे समुदाय के सामने ये बात साबित हो जाती है, कि वे अब बच्चे नहीं रहे और बड़े हो चुके हैं।
बहुत दर्दनाक है यह टेस्ट?
मान्यता के मुताबिक यहां के युवक अपनी मर्दानगी को साबित करने के लिए बुलेट प्रजाति की एंट से खुद को कटवाते हैं। बुलेट प्रजाति की एंट चींटियों की खतरनाक और जहरीली प्रजाति है। इस रस्म को पूरा करने के लिए एक-दो नहीं, बल्कि ढेरों चींटियों से भरे दस्तानों में हाथ डालना पड़ता है। इन ज़हरीली चींटियों के दंश से भयानक दर्द होता है, लेकिन युवकों को दर्द को नज़रअंदाज़ कर नाचना होता है।
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कैसे पूरी करते हैं प्रथा?
इस प्रथा को अंजाम देने के लिए लड़कों को सबसे पहले बुलेट एंट जुटानी होती हैं। इसके लिए 12 साल या इससे ज्यादा की उम्र के लड़कों को जंगल जाना होता है। उन्हें जंगल जाकर लकड़ी के दस्ताने बनाने पड़ते हैं और इसमें चींटियों को जमा करना होता है।
इसके बाद पारंपरिक डांस होता है और इस बीच टेस्ट में शामिल होने वाले लड़कों को को कम से कम 20 बार इन दस्तानों को बदलना पड़ता है। कहते हैं कि इस परीक्षा के दौरान मधुमक्खी के काटने से भी तीन गुना ज्यादा दर्द होता है।

