स्वर्ण समाज के लिए काला धब्बा है UGC नियम, वापस लो, नहीं तो घेराव करेंगे, करणी सेना की चेतावनी
सरकार के यूजीसी को लेकर बनाए गए नियम पर बवाल जारी है। बुधवार को इंदौर में यूजीसी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। करणी सेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन किया और यूजीसी का पुतला जलाकर चेतावनी दी अगर यह नियम सरकार ने वापस नहीं लिया तो जगह जगह प्रदर्शन करेंगे और घेराव करेंगे।
करणी सेना के सदस्य राहुल सिंह जादौन ने वेबदुनिया को बताया कि यूजीसी नियम स्वर्ण समाज के लिए काला कानून है। यह एक तरह से स्वर्णों पर धब्बा है। उन्होंने कहा कि अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो पूरे प्रदेश में धरना देंगे और प्रदर्शन करेंगे। जादौन ने कहा कि इसके लिए वे सांसद शंकर लालवानी से मिलकर इस नियम को वापस लेने और खत्म करने का आग्रह करेंगे। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गई तो उनके घर का घेराव करेंगे और पूरे प्रदेश में बडा आंदोलन चलाएंगे।
क्या है UGC का नया 'इक्विटी' नियम?
दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 15 जनवरी 2026 से पूरे देश में नए नियम लागू किए हैं। इनका सीधा सा मकसद है कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में भेदभाव (Discrimination) को खत्म करना। UGC चाहता है कि किसी भी छात्र के साथ उसकी जाति, जेंडर या बैकग्राउंड की वजह से बुरा बर्ताव न हो। ये नए नियम 2012 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। UGC का कहना है कि पुराने कायदे अब आउटडेटेड हो गए थे, इसलिए उन्हें और ज्यादा सख्त और साफ बनाया गया है ताकि हर छात्र को बराबर का सम्मान मिल सके।
OBC वर्ग को शामिल करना
सबसे ज्यादा हंगामा इसी बात पर है। नए नियमों में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी 'जातिगत भेदभाव' की कैटेगरी में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी के कई लोगों और छात्रों का मानना है कि OBC को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें भी इस कैटेगरी में रखना बाकी छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है।
ग्लोबल रैंकिंग और क्वालिटी का तर्क
सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग यह कह रहा है कि हमारी यूनिवर्सिटीज पहले ही वर्ल्ड रैंकिंग में पिछड़ रही हैं। ऐसे में सरकार को पढ़ाई की क्वालिटी सुधारने पर ध्यान देना चाहिए, न कि नए-नए नियम लाकर विवाद बढ़ाना चाहिए। कुछ लोगों को डर है कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है।
Edited By: Navin Rangiyal