1. समाचार
  2. वेबदुनिया सिटी
  3. इंदौर
  4. Janak Didis inspirational workshop on Sustainable Marriage concludes
Written By WD Feature Desk
Last Updated : शनिवार, 29 नवंबर 2025 (15:38 IST)

जनक दीदी की प्रेरणात्मक कार्यशाला 'सस्टेनेबल मैरिज' का आयोजन संपन्न

'शादी में कचरा नहीं करना' और 'बाद में शादी का कचरा नहीं करना'

Jimmy and Janak Didis wedding
प्रकृति-प्रेम और सतत जीवन को समर्पित जिम्मी और जनक मगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ने जिम्मी और जनक दीदी की शादी की 37वीं सालगिरह के अवसर पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन 27 नवंबर 2025, गुरुवार को उनके निवास स्थान 'गिरिदर्शन' सनावदिया में किया। 
 
कार्यक्रम की शुरुआत जीवांश बत्रा के शंखनाद और जनक दीदी की बहाई प्रार्थना से हुई। मुख्य अतिथि कलापिनी कोमकली (भारतीय शास्त्रीय गायिका) को एक पौधा भेंट किया। कलापिनी कोंमकली ने सभी को याद दिलाया कि शादी को व्यवसाय नहीं बनना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि शादियां जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं हैं जिनका असली उद्देश्य पूरा होना चाहिए, न कि सिर्फ़ दिखावे या फिजूलखर्ची का मंच। सच्ची परंपराओं, खासकर जो खुद जोड़े के लिए होती हैं, को संरक्षित और ईमानदारी से निभाया जाना चाहिए।
 
कार्यक्रम में पधारे सभी का स्वागत करते हुए डॉ. श्रीमती जनक पलटा मगिलिगन ने कार्यशाला का मूल उद्देश्य और महत्व कुछ इस प्रकार बताया- 'ईश्वर के आशीर्वाद से आज हमारी शादी की 37वीं सालगिरह है। हालांकि हमारा शारीरिक दाम्पत्य जीवन केवल 23 साल का ही रहा। जब 21 अप्रैल 2011 को मेरे पति जिम्मी मगिलिगन अपनी जीवन यात्रा पूरी कर ईश्वर को प्यारे हो गए। 
 
भारतीय संस्कृति में वैवाहिक वर्षगांठ की परम्परा का इतना चलन नहीं था और पति के चले जाने के बाद, शादी सालगिरह मनाने का प्रश्न नहीं उठता। महिला विधवा हो जाती है और सुहाग की सभी निशानियां भी हटा देती है, जैसे मांग में सिंदूर, बिंदी, मंगलसूत्र, बिछिया, चूडियां, श्रृंगार आदि। वो अशुभ हो जाती है, उसे पारिवारिक शादियों और शुभ अवसरों में भाग लेने की अनुमति नहीं होती है।

जब कि पुरुष के लिए ऐसा कोई समाजिक या सांस्कृतिक बंधन नहीं है। जिम्मी और मैं दोनों शादी के पहले से ही 'बहाई धर्म' के अनुयायी होने के नाते अपने दाम्पत्य जीवन को मानवता रूपी पक्षी के दो समान पंख की तरह से जीने में प्रयासरत रहे, जिसका आधार मानव जीवन की आध्यात्मिक वास्तविकता है, न कि केवल भौतिक, सामाजिक या भौतिक ...। 
 
अपने खुद के जीवन में अपने मायके में सबसे बड़ी होने के नाते मेरी यह सोच और और कोशिश भी रही कि रिश्तेदारी में भी किसी महिला को विधवा होने पर सामाजिक अन्याय न हो उससे सम्मानजनक व्यवहार किया जाए! लेकिन मेरा तरीका कभी आक्रमक नहीं रहा। मेरी अपनी शादी के दौरान मेरी बुआ जी, मामी जी, जिन्होंने विधवा होने के कारण कभी भी हल्दी, चूडा पहनाने व अन्य शुभ मौकों में भाग नहीं लिया था, मैंने अपनी शादी में सबसे पहले सभी शगुन उनसे करवाए... 
(अपनी और जिम्मी की सरल सगाई और पर्यावरण-सचेत कहानी फोटो साझा करते हुए) देखिए, ये शादी वाली साड़ी 37 वर्षों से हर साल आज के दिन यही पहनती हूं। जो इस सिद्धांत पर आधारित है 'शादी में कचरा नहीं, शादी के बाद शादी का खर्चा नहीं'- शादी के दौरान कोई बर्बादी नहीं और बाद में कोई वित्तीय बोझ नहीं।'

उन्होंने बताया कि जीवन का उद्देश्य ईश्वर के प्रेम के लिए, प्राणियों में सद्भावना पैदा करना है। कार्यशाला का उद्देश्य जन-जन तक इस सोच को पहुंचाना था की कैसे कम से कम खर्च पर स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त विवाह का अयोजन किया जाए ताकि पैसों का दुरुपयोग भी न हो और शादी समारोह के बाद होने वाला कचरा भी न हो। 
 
कार्यशाला में सस्टेनेबल शादी, जीरो वेस्ट और सफल शादी के उदाहरण ख्यात हृदय रोग चिकित्सक डॉ. भरत रावत की माताजी श्रीमती विद्यावती रावत और पत्नी अंजलि रावत ने बिटिया डॉ. काव्या की शादी को सादगी से करने के लिए गेस्ट लिस्ट छोटी रखी, प्लास्टिक की बोतल की जगह कांच के ग्लास, मेटल के बर्तन यूज किए और कोई डिस्पोजेबल कटलरी यूज नहीं की। फ़ूड वेस्ट को प्रोसेस करवाया ताकि लैंडफिल में न डाले जाएं, मेनू साधारण और कम रखा, डेकोरेशन कम और रियूजेबल, कोई फायर क्रैकर यूज नहीं किया।  
 
डॉ. क्षमा पैठणकर ने अपनी बहन डॉ. माया इंगले और उदय इंगले की बेटी ईशा की शादी की कहानी साझा की, जीरो वेस्ट बनाने का विचार और मार्गदर्शन हमें जनक पलटा दीदी से प्राप्त हुआ। पर्यावरण को सुरक्षित रखने पूर्णतः जीरो वेस्ट बनाने के लिए पूरी तरह प्लास्टिक-रहित रखा। अख़बार और कलेवे का उपयोग करके वस्तुओं को बांधा गया, किसी भी प्रकार की प्लास्टिक पैकेजिंग का उपयोग नहीं किया गया। सजावट में फूलों की जगह कपड़े के फूल बनाए गए। यहां तक कि रंगोली में मोती का उपयोग किया गया। 
 
डॉ. यामिनी रमेश, डॉ. वैभव जैन, होम्योपैथिक डॉक्टर दंपती डॉ. वैभव जैन और डॉ. यामिनी जैन ने अपनी शादी को पूरी तरह मिनिमल, सस्टेनेबल और पर्यावरण–अनुकूल तरीके से आयोजित किया। शादी में न तो प्लास्टिक का कोई उपयोग हुआ और न ही खाद्य अपव्यय, क्योंकि मेन्यू को भी बेहद सरल और सीमित रखा गया था।

दंपती ने उपहार लेने से इंकार करते हुए मेहमानों को देहदान और नेत्रदान का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप 17 देहदान और 278 नेत्रदान फॉर्म भरे गए। दंपती का कहना है कि उन्होंने 'दिखावे के बजाय आशीर्वाद और बड़े जश्न के बजाय प्यार व साथ' को चुना। 
 
स्वाहा कम्पनी के डायरेक्टर रोहित अग्रवाल बताया कि इन्दौर शहर में सबसे ज्यादा फूड वेस्ट शादी समारोह स्थलों से शादियों के दौरान किया जाता है| शादियों के सीजन में एक दिन में लगभग 4000 किलो कचरा स्वाहा टीम के द्वारा एकत्रित किया जाता है।

इस वर्कशॉप का मैसेज जन-जन तक पहुंचना चाहिए ताकि कचरा करने की आदत को ख़त्म किया जा सके। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक टिकाऊ शादी की दिशा में पहला और सबसे प्रभावी कदम भोजन मेनू को छोटा करना है, क्योंकि छोटा मेनू सीधे तौर पर भोजन की बर्बादी और अनावश्यक संसाधनों के उपयोग को कम करने में योगदान देता है। 
 
सेंट पॉल इन्स्टीट्यूट, महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज, श्री वैष्णव इन्स्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के छात्रों और फैकल्टीज ने भी इस आयोजन में भाग लिया। इस अनोखी कार्यशाला में गहरी दिलचस्पी दिखाई। सेंट पॉल इन्स्टीट्यूट की फैकल्टी डॉ. विधि परयानी ने कहा 'जनक दीदी की सस्टेनेबल मैरिज प्रेरणात्मक कार्यशाला में आकर बात स्पष्ट हुई, कि वर्तमान पीढ़ियों की ज़रूरतें पूरी होने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों की ज़रूरतों को भी पूरा करने में योगदान दे सकती है।

विवाह एक पवित्र बंधन है, जिसे केवल परिवार के साथ सादगी से मनाया जाना चाहिए; अत्यधिक मेहमानों का निमंत्रण संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी है। शून्य-अपशिष्ट (जीरो वेस्ट) विवाह के प्रति परिवार के सदस्यों में आने वाले प्रतिरोध को कैसे संभालें, यह सीखा। छोटा-सा कदम भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है। विवाह में दूल्हा-दुल्हन यदि मिलकर जीरो वेस्ट विवाह का निर्णय लें, तो इससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। दिखावे भरी शादी पलभर की खुशी दे सकती है, लेकिन सस्टेनेबल मैरिज समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।'
 
कार्यशाला का समापन जनक पलटा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।ALSO READ: जनक दीदी की कार्यशाला 'सस्टेनेबल मैरिज' का विशेष आयोजन 27 नवंबर को
ये भी पढ़ें
मौलाना मदनी के बिगड़े बोल, सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल, वंदे मातरम पर भी विवादित टिप्पणी