Ganga Maiyas Bhog: गंगा दशहरा के पावन पर्व पर मां गंगा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इस दिन मैया को उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है। चूंकि यह त्योहार भीषण गर्मी के मौसम या ज्येष्ठ मास में आता है, इसलिए मैया के भोग में शीतलता प्रदान करने वाली चीजों को मुख्य रूप से शामिल किया जाता है।
अगर आप भी इस गंगा दशहरा (25 मई 2026) पर मां गंगा को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इन विशेष भोग सामग्रियों को अपनी पूजा में जरूर शामिल करें:
1. सत्तू का भोग (सबसे महत्वपूर्ण)
गंगा दशहरा पर सत्तू का भोग लगाना और इसका दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। जौ या चने के सत्तू में घी और शक्कर (या गुड़) मिलाकर लड्डू या पेड़े बनाएं और मां गंगा को अर्पित करें। यह भोग शीतलता का प्रतीक है।
2. मौसमी फल (तरबूज और खरबूजा)
गर्मी के इस मौसम में आने वाले रसीले फल जैसे तरबूज, खरबूजा, और आम मां गंगा को बहुत प्रिय हैं। विशेष रूप से खरबूजे का भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
3. खीर या सफेद मिठाई
मां गंगा को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। आप दूध, चावल और मखाने से बनी खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा काजू कतली, रसगुल्ला या पेड़े जैसी सफेद मिठाइयों का भोग भी मैया को लगाया जा सकता है।
4. मालपुए का भोग
कई स्थानों पर गंगा दशहरा के दिन मां गंगा को मालपुए का भोग लगाने की विशेष परंपरा है। शुद्ध देसी घी में बने मालपुए मैया को अर्पित करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
5. मिश्री और माखन
भगवान कृष्ण की तरह मां गंगा को भी मिश्री और माखन का भोग बहुत भाता है। यह भोग मन को शांति और ठंडक प्रदान करने वाला माना जाता है।
भोग लगाते समय ध्यान रखें ये 'विशेष नियम':
संख्या 10 का महत्व: गंगा दशहरा पर '10' की संख्या का बड़ा महत्व है। कोशिश करें कि आप जो भी भोग (जैसे मालपुए, लड्डू या फल) अर्पित कर रहे हैं, उनकी संख्या 10 हो।
10 दीपक और फल: पूजा के समय मां गंगा के सामने 10 दीपक जलाएं, 10 प्रकार के फल या फूल अर्पित करें और 10 ब्राह्मणों या जरूरतमंदों में इस भोग को प्रसाद के रूप में बांटें। इससे अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
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