भवन का प्रारूप वास्तुविद् की सलाह से तैयार करवाएँ। विद्वान ज्योतिषी से शुभ मुहूर्त्त निकलवा कर नींव खनन करके गृह निर्माण प्रारंभ करवाएँ। शिलान्यास व वास्तु शान्ति शास्त्रीय रीति से करें।
मकान बनाते समय दक्षिण व पश्चिम दिशा की अपेक्षा उत्तर व पश्चिम दिशा की अपेक्षा उत्तर व पूर्व में सर्वाधिक खुला स्थान रखें। सूर्य का प्रकाश भवन को प्रकाशित करे या अधिक देर तक धूप रहे, ऐसा होना आवश्यक है।
भूमि पर निर्माण कार्य का प्रारंभ सर्वप्रथम पश्चिम या दक्षिण दिशा में करें, फिर अन्य दिशाओं में आगे बढें। दक्षिण व पश्चिम में मोटी दीवारें होनी चाहिए।