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Written By ND

देखने में क्या हर्ज!

विवाह लड़की लड़का
- मनोज कुमार

चाचाजी और चाचीजी अभी अपने बेटे का विवाह नहीं करना चाहते थे, क्योंकि लड़का आत्मनिर्भर नहीं था, परंतु उनके श्वसुर एक बार अपने मित्र की लड़की देखने पर जोर दे रहे थे।

जब बात किसी तरह से नहीं बन पाई तो उनके जाने के बाद चाचीजी ने सुझाव दिया कि पिताजी इतना जोर दे रहे हैं तो लड़की देखने चले चलते हैं। वहाँ चलकर लड़की में कोई नुक्स निकालकर मना कर देंगे।

पिताजी की बात भी रह जाएगी और हमें अपने बेटे की अभी शादी भी नहीं करना पड़ेगी। उनकी बात सुनकर मैं सन्न रह गया। क्या लड़की और उसकी भावनाओं की कोई कीमत नहीं होती?

क्या किसी को बिना किसी कारण से हीनता का अहसास कराना उचित है? इस प्रकार का विचार मन में लाते समय हम अपनी बेटियों को कैसे भूल जाते हैं।
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ND