एक बार बादशाह अकबर ने दरबार में पूछा, 'किसकी चलती है?' एकदम बहु सारे उत्तर आए, बहुतों ने कहा 'जहाँपनाह, आपकी चलती है,' कुछेक ने कहा, 'जहाँपनाह, नीचे तो आपकी ही चलती है पर ऊपर खुदा की चलती है।'
बादशाह को संतोष नहीं हुआ। उसने बीरबल से पूछा, 'बीरबल, तुम बताओ। बड़े अदब के साथ बीरबल ने बादशाह को सलाम किया, कहा, जहाँपनाह, कह चाहे कुछ भी लीजिए, लेकिन चलती स्त्री की ही है।'
बादशाह नाराज हो गया भारी, बस रहा पाजमे में ही। बोला 'बीरबल, जानते हो कि तुमने यहाँ बैठे इतने वीर पुरुषों की तौहीन कर दी है। कहाँ ये सूरमा, कहाँ स्त्री?'
इतने में बाँदी ने आकर सलाम ठोका, जमीन से लगकर बादशाह से फुसफुसाकर कुछ कहा और फिर से सलाम ठोककर चली गई। सारा दरबार बादशाह का मुँह तकने लगा।
बादशाह का चेहरा दमक रहा था। पूरे दरबार को अपनी ओर तकते देखकर खुश हुआ, फिर बीरबल को विशेष करके बोला, 'बीरबल, तुम्हारी बात के इस बार तो परखचे ही उड़ गए। बेगम ने कहलाया है कि किसकी चलती है इस बहस से कोई फायदा नहीं। भले ही औरत की चलती है पर चलाता तो मर्द ही है, इसलिए बहस खत्म की जाती है।'