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हरसिंगार इस बार भी
अनन्त मिश्र हरसिंगार इस बार भीसितंबर के अंत मेंढेरों खिलेकुछ जमीन पर झरेऔर कुछ चुने गएकुछ ओढ़ लिए गएरोज सुबहघंटे भर के अंदरअपनी महकसुंदरता और रंगलुटाने वाले हरसिंगार के पुष्पों काशीतकालीन मौसमी जीवन हर वर्ष दुहराया जाएगाऔर हर वर्ष शायद तुम्हारी देह की दुनिया मेंउसी को पाया जाएगा । साभार: दस्तावेज