वह जो तुम दे देते
मुरली मनोहर श्रीवास्तव
हे प्रभुवह जो हम तुमसे माँगते हैंऔर जो तुम दे देते हो हमेशाएक सा नहीं होताजब तुम्हारा दिया हुआज्यादा होता है हमारी उम्मीद सेतो हम खुश होते हैं इतनेकि भूल जाते हैं धन्यवाद देना तक और जब यह हमारे माँगे हुए से कम होता हैतो तुम्हें याद करते हैं कसक के साथजब तुम्हारा दिया हमारे माँग से विपरीत होता हैतो हम सह नहीं पाते और तड़प उठते हैं
यही वह रहस्य हैजहाँ तुम जीतते होऔर मैं हार जाता हूँक्योंकि समय के साथजब उसकी सार्थकता आती है सामनेतो होता है अहसास किजब कभी जो माँगावह तुम दे देते तोहम कब कानष्ट कर चुके होतेभस्मासुरी प्रवृत्ति सेस्वयं को।