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Written By WD

लाभ की ओर उन्मुख पैर

लाभ
गजानन चव्हाण
NDND
मुद्रा पर टिकी हुई
उसकी मुद्रा को देख
तुम उसे चाहने लगे हो!
अफ़सोस !!
अफ़सोस कि
लाभ की ओर उन्मुख उसके पैर
चलते-चलते जब हड़बड़ी में दौड़ने लगते हैं
तुम भी सोचने लगते हो-
मिट जाए यह फ़ासला
या जुड़ जाएँ उसके दो पैरों में
हजार-हजार पैर
दौड़कर जिन पर पहुँचे वह
लाभ तक
लाभों तक लाभों के ढेर तक
ढेर के ढेर लाभों तक।
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WD