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लाभ की ओर उन्मुख पैर
गजानन चव्हाण मुद्रा पर टिकी हुई उसकी मुद्रा को देख तुम उसे चाहने लगे हो!अफ़सोस !!अफ़सोस कि लाभ की ओर उन्मुख उसके पैर चलते-चलते जब हड़बड़ी में दौड़ने लगते हैं तुम भी सोचने लगते हो-मिट जाए यह फ़ासला या जुड़ जाएँ उसके दो पैरों में हजार-हजार पैर दौड़कर जिन पर पहुँचे वह लाभ तक लाभों तक लाभों के ढेर तक ढेर के ढेर लाभों तक।