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यही जिंदगी है प्यारे
विलास पंडित 'मुसाफिर' थोड़ी खुशियाँ थोड़े से गम यही जिंदगी है प्यारे काम है ज्यादा वक्त बहुत कम यही जिंदगी है प्यारे परछाईं भी दिन की साथी शाम ढले छुप जाती है कौन है आखिर सच्चा हमदम, यही जिंदगी है प्यारे गम ने तो आँसू ही आँसू दामन में बरसाए पर खुशियों में भी आँख हुई नम, यही जिंदगी है प्यारे पैदा होना, लिखना-पढ़ना दुख से लड़ना मर जाना जीवन के बस चार ही मौसम यही जिंदगी है प्यारे सोचो दो सड़के भी अक्सर दोराहे पर पर मिलती है बन जाए कुछ रिश्ते बाहम यही जिंदगी है प्यारे।