मौन भाषा प्रेम की
ज्योति जैन
निष्कपट, निष्पापप्रेम कीपरिभाषातुम बता गए,जाने-अनजाने द्वार पर मन के तुमकब आ गए!पहली बार भीअजनबी तुम,कभी नहीं मालूम हुए,सदियों से जोनिभा रहे थे,रिश्ते सम्मुख आ गए।नजरों ने नजरों को छू लिया,कहने की कुछ बातनहीं थी,मौन प्रेम की भाषा होतीनजरों से तुम सिखा गए।