Poem on Anna | मशाल जलती रहनी चाहिए
- आशा जाकड़
ND
अब न रुकने चाहिए।
कारवां जो चल पड़ा है,
चलते रहना चाहिए।
जो आग धधक रही है,
सुलगती रहनी चाहिए।
धुंआ जो उठ रहा है,
उठते रहना चाहिए।
जो मशाल जली है,
जलती रहनी चाहिए।
भारत में भ्रष्टाचार का,
सफाया होना चाहिए।
युवा जाग गए हैं,
नई राह मिलनी चाहिए।
बहुत घूस ले चुके,
अब ईमानदारी होना चाहिए।
ND
उस राह चलना चाहिए।
कथनी-करनी एक कर,
सद्भाव दिखाना चाहिए।
अन्ना के सपनों को,
साकार करना चाहिए।
