1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. बस, एक शब्द बूँद!
Written By स्मृति आदित्य

बस, एक शब्द बूँद!

फाल्गुनी

शब्द बूँद
ND
कभी तो झरो
मुझ पर
एक ऐसी शब्द-बूँद
कि मेरी मन-धरा पर
प्रस्फुटित हो जाए
शर्माया हुआ प्यार का कोमल अंकुर
सिर्फ तुम्हारे लिए।

कभी तो रचों
मेरे इर्द गिर्द
शब्द-फूलों का रंगीन समाँ
कि मैं महकने लगूँ और
भर जाऊँ खुशियों की गंध से
सिर्फ तुम्हारे लिए।

ND
कभी तो आने दो
मेरे कजरारे बालों तक
नशीली
शब्द-बयार का झोंका
कि मेरे पोर-पोर में
खिल उठें
ताजातरीन कलियाँ
सिर्फ तुम्हारे लिए।

कभी तो पहनाओं
अपनी भावनाओं को
ऐसे शब्द-परिधान
कि ‍जिन्हें देखकर लहरा उठें
मेरे भीतर का भीगा सावन
सिर्फ तुम्हारे लिए।

मत बरसाओं मुझ पर
ऐसी शब्द-किरचें
कि होकर लहूलुहान
मैं, बस रिसते जख्म ही
ला सकूँ
तुम्हारे लिए!
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य