गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026
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Written By WD

फूल-फूल पर बैठना

फूल
शिव योगी
NDND
उनका

उतना ही पुराना संसार

सृजन की श्रृंखलाओं का

जितना भी विस्तार

प्रेम करने की

जितनी भी

पुरानी हो परिभाषाएँ

तितलियों में

गहरी घनी

उज्जवल सजल है प्रत्याशाएँ

जब भी कभी

खिला होगा

धरती पर

पहला पहला फूल

तितलियों ने

तान दिए होंगे

सतरंगी दुकूल

सब जगह हैं वे

यहाँ वहाँ तहाँ

घाटी दर्रे

चोटियों पर

वृक्षों-पौधों

पत्तियों पर

निरापद है

ति‍तलियों का

फूल-फूल पर बैठना

मिट जाती है वे

उड़ते उड़ते निशंक

उनके नहीं होते डंक

तितलियाँ

ब्रह्मांड में

नाद है अनहद

वे नहीं चुनती शहद

वे सृष्टि का सौष्ठव

सौंदर्य का सार

वे महीनों सालों

युगों युगों तक

करती रही

वासंतिक छटाओं के

महकने का इंतज़ार

तितलियाँ घुमक्कड़ है

तितलियाँ पियक्कड़ है

प्रकृति का उपहार

वे बाँटती हैं प्यार

साभार : संबोधन