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Love Poem in Hindi | प्रकृति और प्रेम

ज्योति जैन

हिन्दी कविता
ND
प्रकृति और प्रेम! दो खूबसूरत अहसास
मानो, पूरक हों एक-दूजे के
खिल उठता है मन देख छटा प्रकृति की।

छू लिया जब तितली के
कोमल पंखों को,
अंगुलियां पर लगा पीला रंग
मानो बिखेर गया हो छटा प्रकृति की
हथेलियों पर।

प्रेम भी जब छू लेता है,
तन को नहीं,
सिर्फ आत्‍मा को ही।

मानो सारे इंद्रधनुषी रंग फैल गए हों
जिंदगी में।

तन-मन दोनों को ही
आनंदि‍त कर देते हैं
प्रकृति और प्रेम
देर है तो सिर्फ
महसूस करने की।