पाँच साल के बाद ....
चुनावी दोहे
ओम वर्मा घोषित जबसे हो गए, वन में आम चुनाव। हर प्राणी ने आप ही, बदला आज स्वभाव॥गधा नहीं है अब गधा, लड़ने चला चुनाव। हट सकता है वह तभी, मिले अगर कुछ भाव॥शेर मेमने को यहाँ, करने लगा सलाम। यानी बस नजदीक है, वही चुनावी शाम॥मामा कहकर छू रहे, चरण आज दिन-रात। फिर मिलना है आपसे, पाँच साल के बाद॥ये बोले बिन सोनिया, मन जी करे न काम। वे बोलीं ये संघ के, पूरी तरह गुलाम॥बहिन कहे "पीएम" के, उसमें गुण मौजूद।मगर बहिन कुछ और भी, रखते यहाँ वजूद॥आरोपित कर "रासुका", किया उसे मशहूर।जिसको बच्चा जान सब, भाग रहे थे दूर॥ लटक चुके हैं कब्र में, जिनके दोनों पाँव। औलादों के नाम पर लगा रहे वो दाँव॥ भौंक रहे हैं श्वान से, कहलाते थे शेर। भद्रजनों के बीच में, कैसा पनपा बैर॥सूरज को सूरज तभी, मानेंगे श्रीमान। जब दिल्ली में मान लें, उनके हाईकमान॥