गुरुवार, 29 जनवरी 2026
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Written By WD

पग-पग चल कर देख

सकीना हुसैन दाहोदवाला

कविता
ND
पग पग चल कर देख
अदल -बदल कर,
पलट-पलट कर,
संभल-संभल कर देख,
सिक्के का पहलू चुनना तुझे है,
अदल-बदल कर देख।
कई हैं वो रास्ते,
जो मंजिल को पहुँचे,
किस रास्ते पर तुझे चलना है,
पग-पग चल कर देख।
कहीं धूप है, कहीं छाँव,
कहीं शीत है, कहीं ताव,
बच-बचकर हर मुश्किल से,
राह तो होगी आसान,
पर हाथ तेरे आया क्या,
टोल-टोल कर देख।
काँटों की राह पर
लगेगा वक्त बहुत,
श्रम बहुत, कष्ट बहुत,
पर अलग हटकर
अपनी राह बनानी है,
तो थक-थक कर देख।
दुर्लभ रास्ता बहुत कुछ
माँगता है,
पर दे जाता है वो अनुभव
जो तू संजो कर देख।