पग-पग चल कर देख
सकीना हुसैन दाहोदवाला
पग पग चल कर देखअदल -बदल कर,पलट-पलट कर,संभल-संभल कर देख,सिक्के का पहलू चुनना तुझे है,अदल-बदल कर देख।कई हैं वो रास्ते,जो मंजिल को पहुँचे,किस रास्ते पर तुझे चलना है,पग-पग चल कर देख। कहीं धूप है, कहीं छाँव,कहीं शीत है, कहीं ताव,बच-बचकर हर मुश्किल से,राह तो होगी आसान,पर हाथ तेरे आया क्या,टोल-टोल कर देख।काँटों की राह परलगेगा वक्त बहुत,श्रम बहुत, कष्ट बहुत,पर अलग हटकरअपनी राह बनानी है,तो थक-थक कर देख।दुर्लभ रास्ता बहुत कुछमाँगता है,पर दे जाता है वो अनुभवजो तू संजो कर देख।