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नव वर्ष की नव प्रभात
नववर्ष का नव उल्लासनवल गीत है नवल रागक्यों न झूमें अब हम सारेगम की काली रात भुला दें।स्वागत को नववर्ष की कर लो अब तैयारी द्वार पर बधाइयों की देखो पाती आई। आज झूमने लगा है मन खिले बाग में नए सुमनजीवन राग पंछियों ने गायासबको जगाने सूरज आया।नवसृजन का रचें आज हम एक नया इतिहास।गम की बीती बात भुलाकर आओ सीखें करना प्यार। जब बँधेगी मुट्ठी हमारी तब झुकेगी दुनिया सारी। जीतेंगे हम हारी बाजी आओ मंगल गीत गाएँ नववर्ष को यादगार बनाएँ।
लेखक के बारे में
गायत्री शर्मा