नव वर्ष की नव प्रभात
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नवल गीत है नवल राग
क्यों न झूमें अब हम सारे
गम की काली रात भुला दें।
स्वागत को नववर्ष की
कर लो अब तैयारी
द्वार पर बधाइयों की
देखो पाती आई।
आज झूमने लगा है मन
खिले बाग में नए सुमन
जीवन राग पंछियों ने गाया
सबको जगाने सूरज आया।
नवसृजन का रचें आज
हम एक नया इतिहास।
गम की बीती बात भुलाकर
आओ सीखें करना प्यार।
जब बँधेगी मुट्ठी हमारी
तब झुकेगी दुनिया सारी।
जीतेंगे हम हारी बाजी
आओ मंगल गीत गाएँ
नववर्ष को यादगार बनाएँ।

