मंगलवार, 6 जनवरी 2026
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Written By WD

दूर नहीं जा रहा सूरज

काव्य-संसार

काव्यसंसार
दीपाली पाटी
ND
और कहीं दूर नहीं जा रहा सूरज
उस पहाड़ी के पीछे छुप जाएगा
वहाँ एक और दुनिया है जहाँ
शायद कोई और भी
करवट बदल रहा होगा
उसके इंतजार में,
कुछ अधूरी बातों के सिरे मिला रहा होगा,
सूरज को आईना बनाकर वह देखेगा
एक पूरा दिन
यादों के सहारे कैसे कटता है
उजियारे के हर क्षण से करेगा तुलना
मन में घुले अँधियारे की।
इंतजार करता होगा वह भी
कि दिन के उजाले में
दिख जाए वो पगडंडी
जो सपने में धुँधली सी दिखती है
पर पहाड़ी के उस पार पँहुचती नहीं।