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तुम कहीं मत जाना..
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सीमा पांडे 'सुशी' सुबह जब आएगीमाँगेगी पानी और एक कप चायभाग-दौड़ करता फिरेगा समयघर में भगदड़ होगी तुम कहीं मत जाना..तुम चली जाओगी तो किसकी आहट गूँजेगीसूने पड़े रहेंगे कमरे तरसेंगे चूड़ियों की खनखनाहट कोछत पर निश्चिंतता से सूखते कपड़े तरसेंगे अपनी बुलाहट कोतुम कहीं मत जाना...तुम्हारे जाने से आँगन हो जाएगा उदासकौवे-चिड़िया कहाँ जाकर बुझाएँगे प्यासकौन बुहारेगा नीम की जर्द पत्तियों कोकौन करेगा बाहर सारी मायूसियों को तुम कहीं मत जाना...तुम्हारे जाने से सब कुछ हो जाएगा मृतप्रायःघर की चीजें पड़ी रहेंगी उदासमानो या न मानो जी घबराएगायह घर-घर नहीं रह जाएगातुम कहीं मत जाना...