गुरुवार, 22 जनवरी 2026
  1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. तुम
Written By स्मृति आदित्य

तुम

फाल्गुनी

हिन्दी प्रेम कविताएं
तुम, एक हवा जो चंपा से बहकर आई,
तुम, एक धूप जो गुलमोहर से छनकर आई,
तुम, एक नदी जो मेरी आंखों से छलछल आई,
तुम, एक दुआ जो मेरी मुट्ठी में बंधकर आई,
तुम, एक सांझ जो मन की तपन में ठंडक लाई,
तुम, एक आवाज जो दिल में उतर आई,
तुम, तरंगित साज जिसे अब तक भूला नहीं पाई,
तुम, तन्हाई में खुली आंखें जिन्हें अब तक सुला नहीं पाई।