अठारह बरस की एक लड़की चौंक पड़ी है हैरान सी ढूँढती है वह उस गंध को जिसकी गाँठ खुल गई है उसके भीतर।
दूर आसमान में ताकते अचानक वह मुस्कुरा देती है शायद! कोई नाम याद आ गया है एक मीठा दर्द पूरे जिस्म में लहर बनकर फैल रहा है। साज के सारे तार झनझना दिए हैं भरपूर-सी एक अँगड़ाई ने।
लड़की दाँतों से काटती है होंठ कुतरती है अपने नाखून भरती है ठंडी साँस और सोचती है रात की अनंत इच्छाओं और सपनों की दूरियों के बारे में।