...तमन्ना रह गई अधूरी
- विलास पंडित 'मुसाफ़िर'
एक लड़कीशहर में बदहवास सी फिर रही थीवो अनजान धनाढ्य दरिंदों के बीच घिर रही थी, उसे तलाश एक नौकरी की थीफिक्र! भाई बहनों की ज़िंदगी की थीशिक्षा?मजबूरीवश पूरी न कर सकीभाई बहनों की जिम्मेदारी के चलतेचाह के भी न मर सकीउसके लिए जरूरी था भाई बहनों का भरण-पोषणयही वजह थी कि आदमी रूपी दानवकरना चाह रहा था उसका शोषण,
लाख चाहा मगर नसीब न हुई दो वक्त की रोटीऔर भूख से बेज़ारसख्त बीमार हो गई उसकी बहन छोटी सच के साथ जीने की,तमन्ना रह गई अधूरी और बाजार में ले आईउसे उसकी मजबूरी....!