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जिस डाली ने फूल बिखेरे
जमना प्रसाद 'जलेश' मन का मीत मिला न कोईदिल के दुश्मन सभी मिले।जिस डाली ने फूल बिखेरेउसको चुभते फूल मिले।दौलत की दीवाली देखीदेखी भूख किसानों की।कौवे घर-घर मौज उड़ाएँकोयल हुई वीरानों की।श्रमिकों के हाथों में छालेश्रमहीनों को फूल मिले।कैसा न्याय दिया है प्रभुजीकलम धनी को फाँके।अक्षरहीन विराजे कुर्सीखींच रहे हैं खाँके।संविधान के निर्माता हीआज नियम प्रतिकूल मिले।जिस डाली ने फूल बिखेरेउसको चुभते फूल मिले।