मंगलवार, 3 मार्च 2026
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Written By WD

जब तुम चुप रहती हो

साहित्य
-जितेंद्र दव
NDND
जब तुम
चुप रहती हो
आसमाँ
उदास हो जाता है।

बादलों की ओट में
चाँद भी
होता है गुमसुम।

तब सुनाई नहीं देते
स्वर बस्ती के
हवाएँ बंधी लगती हैं
खूटें से।

तब चुप लगता है
सारा जहान
सिवार उस शोर के
जो उठता है।
दिल के किसी कोने से

कि
मैं सुनना चाहता हूँ
चुप तुम्हारी
जब तुम चुप रहती हो।