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एक मासूम होनहार बच्चा
कल रात फिर एक सुसाइड नोट न्यूज पेपर की हैडिंग बन गया एक मासूम होनहार बच्चा अनचाही मौत मर गया।हर कोई लगाता था अपने कयास उससे ऐसे कदम की नहीं थी आस वो था मासूम समझदार बड़ा फिर क्यों हुआ मौत के द्वार जा खड़ा रूदन, विलाप, सवाल अनवरत सत्य था खुलता परत दर परत हर जवाब का निष्कर्ष यही असफलता का सामना कर सका नहीं दीवारें बोल सकती तो कर सकती बयाँ कि उसे दिया गया अपेक्षाओं का अनंत आसमाँउड़ ना सका तो बेचारा डर गया वो मासूम माता-पिता की अपेक्षाओं की बलि चढ़ गया।