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Poem | एक आईना था मेरे साथ

आईना
चमन टी. माहेश्वरी
NDND
एक आईना था मेरे साथ
वो भी टूट गया
साथी तो पहले ही छूट गया
आईने में अपना अक्स देखकर
खुश हो लेता था
कोई तो है मेरे साथ
अब लगता है जिंदगी जैसे
तन्हाइयों में कटेगी
हर रात करवटों में ही जाएगी
तन्हा-तन्हा रहने लगा हूँ
जीवन को जैसे खोने लगा हूँ
न दिन में खुशियाँ आती है
न रात रंगीन सपनों में ले जाती है
मेरे प्यार की आस को यादें जगाती है
हर रात मुझे बहुत रूलाती है
कोई नहीं है अब मेरे पास
एक आईना था मेरे साथ....!