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एक आईना था मेरे साथ
चमन टी. माहेश्वरी एक आईना था मेरे साथ वो भी टूट गया साथी तो पहले ही छूट गया आईने में अपना अक्स देखकर खुश हो लेता था कोई तो है मेरे साथ अब लगता है जिंदगी जैसे तन्हाइयों में कटेगी हर रात करवटों में ही जाएगीतन्हा-तन्हा रहने लगा हूँ जीवन को जैसे खोने लगा हूँ न दिन में खुशियाँ आती है न रात रंगीन सपनों में ले जाती हैमेरे प्यार की आस को यादें जगाती है हर रात मुझे बहुत रूलाती है कोई नहीं है अब मेरे पास एक आईना था मेरे साथ....!