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Written By WD

एक अजीब दिन

कुंवर नारायण

साहित्य
NDND
आज सारे दिन बाहर घूमता रहा

और कोई दुर्घटना नहीं हुई।

आज सारे दिन लोगों से मिलता रहा

और कहीं अपमानित नहीं हुआ।

आज सारे दिन सच बोलता रहा

और किसी ने बुरा नहीं माना।

आज सबका यकीन किया

और कहीं धोखा नहीं खाया।

और सबसे बड़ा चमत्कार तो यह

कि घर लौटकर मैंने किसी और को नहीं

अपने ही को लौटा हुआ पाया।