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ए स्त्री
पंकज शर्मा
ए स्त्रीउठ! हिम्मत कर! मत घबरा!बार-बार गिरकर भीफिर संभल हर बारऔर इस बात की जरा भी मत कर चिंता या फिक्रकि तू हारेगी या जीतेगीक्योंकि तेरी जीत तो तेरीजीत है ही, मगरतेरी हार भी तेरी जीत सेकुछ कम नहीं है अगरतू लड़ती है अपनेवजूद के लिएअन्याय से, अत्याचार सेअनाचार से, व्यभिचार सेऔर स्वयं से भीक्योंकि स्त्री भी दुश्मन हैस्त्री की।ए स्त्रीउठ! हिम्मत कर! मत घबरा!