आना-जाना लगा रहेगा
ज्ञानप्रकाश विवेक
तेज धूप में आना-जाना लगा रहेगापैरों के छाले सहलाना लगा रहेगाटाट के परदे, मैले कंबल, रोग पुराना,जाग-जागकर रात बिताना लगा रहेगाडामर, लाठी, चमरौधा, बीड़ी का बंडलसाथ गरीबी का नजराना लगा रहेगाजीवन जैसे एक जुलाहे का हथकरघा,सुख-दुख का ये ताना-बाना लगा रहेगामैं कहता हूं मेरा कुछ अपराध नहीं है,मुंसिफ कहता है जुर्माना लगा रहेगामेरे हाथ परीशां होकर पूछ रहे हैं,कब तक लोहे का दस्ताना लगा रहेगाबहुत जरूरी है थोड़ी-सी खुद्दारी भीभेड़ बना तो फिर मिमियाना लगा रहेगा।