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Written By WD

अमृत रस बरसाए चंदा

भीकूलाल निमाड़े

कविताएँ
ND
झिलमिल खिली है चाँदनी
निकला है चाँद गोरा
दूध नहाई लगै चाँदनी
धरती दूध कटोरा

हटा घटा का परदा लागै
बड़ी सुहानी चाँदनी
मदमस्ती बिखराए पागल
प्रेमदीवानी चाँदनी

नहीं कालिमा दिखे कहीं
कहीं नहीं अंधियारा
आज चाँदनी है मनभावन
मौसम प्यारा-प्यारा

देख चाँदनी को चंदा
अमृत रस बरसाए
खिलखिलाती चाँदनी
और भी खिल जाए

आओ हिन्दू, आओ मुस्लिम
सिख,ईसाई आ जाएँ
अमृत रस बरसाए चंदा
मन मलिन धुल जाएँ

बीती जाए रात सुहानी
अवसर नहीं गँवाएँ
रात का रोशन रूप निहारें
अपने दीप जलाएँ।

( सौजन्य : नईदुनिया, इंदौर)
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WD