Daily Horoscope
✕

कविता : पेड़ एक मंदिर

Updated: बुधवार, 2 मई 2018 (14:53 IST)
हर पेड़ एक मंदिर है,
कोई नया, कोई पुराना।
कोई पतझड़ में बिखरा,
कोई बसंत में खिलता।
 
लेता कभी न कुछ,
देता नि:स्वार्थ भावपूर्ण।
छांव हो या शीतल हवा,
पुष्प हो या फल हो।
 
सिखाता हमेशा,
झुककर चलना,
मिलकर चलना।
वक्त का दामन थामे,
आसमां को छूना।
 
ना अंधेरों की चिंता,
ना उजाले से गिले।
सुकून मिलता उसे,
आकर जो बैठे तले।
लेखक के बारे में
जयति जैन 'नूतन'

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

80s retro look trend : 80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

हिंदी दिवस 2026: हिंदी नहीं रही अब पहले जैसी, फिर भी दुनिया में बढ़ता जा रहा इसका दबदबा

वरिष्ठ पत्रकार और लेखक कृष्ण मोहन झा की किताब "डा मोहन भागवत संदेश" का विमोचन

पेरिस में बना यूरोप का सबसे बड़ा अक्षरधाम मंदिर

ब्रिक्स से भारत क्या हासिल कर सकता है...?

अगला लेख