1. लाइफ स्‍टाइल
  2. साहित्य
  3. काव्य-संसार
  4. poem on literature

हिन्दी कविता : कविता खड़ी बाजार में...

poem on literature
साहित्यिक सब हो रहे, चबली-चोर-चकार।
जो जितना अकबक लिखे, उतना उत्तम रचनाकार।


 
वर्तमान साहित्य में, शब्द हुए कमजोर।
भाव-प्रवणता मर गई, मचा हुआ है शोर।
 
कविता खड़ी बाजार में, लूट रहे कवि लोग।
कुछ श्रृंगारों पर लिखें, कुछ की कलम वियोग।
 
अश्लीलों को मिल रहा, भारत-भूषण सम्मान।
पोयट्री मैनेजमेंट कर रहा, सरस्वती अपमान।
 
सम्मानों की भीड़ में, खो गया रचनाकार।
साहित्य सुधि को छोड़कर, अहं चढ़ा आचार।
 
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें
ये भी पढ़ें
एसिडिटी से निपटने के 8 घरेलू उपाय...