साहित्यिक सब हो रहे, चबली-चोर-चकार। जो जितना अकबक लिखे, उतना उत्तम रचनाकार। वर्तमान साहित्य में, शब्द हुए कमजोर। भाव-प्रवणता मर गई, मचा हुआ है शोर। कविता खड़ी बाजार में, लूट रहे कवि लोग। कुछ श्रृंगारों पर लिखें, कुछ की कलम वियोग। अश्लीलों को मिल रहा, भारत-भूषण सम्मान।...