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Wed, 21 Oct 2026

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बुजुर्गों का महत्व दर्शाती कविता : आधुनिक

poem
क्या जिंदगी आधुनिक हो गई 
मां अब नहीं देखती दीवार पर 
धुप आने का समय 
अचार में क्या मिलाया जाए और कितना 
बूढ़े पग नहीं दबाए जाते अब क्यों 
क्या जिंदगी आधुनिक हो गई
चश्मे के नंबर कब बढ़ गए 
सुई में धागा नहीं डलता, कांप रहे हाथ 
बूढ़ों को संग ले जाने में शर्म हुई पागल अब क्यों 
क्या जिंदगी आधुनिक हो गई
 
घर के पिछवाड़े से आती खांसी की आवाजें 
संयुक्त दि‍खते परिवार मगर लगता अकेलापन 
कुछ खाने की लालसा मगर कहने में संकोच अब क्यों   
क्या जिंदगी आधुनिक हो गई
 
बुजुर्गों का आशीर्वाद /सलाह /अनुभव पर लगा जंग 
भाग-दौड़ भरी दुनिया में उनके पास बैठने का समय कहां 
गुमसुम से बैठे पार्क में और अकेले जाते धार्मिक स्थान अब क्यों  
क्या जिंदगी आधुनिक हो गई
 
बुजुर्ग हैं तो रिश्ते हैं, नाम है, पहचान है 
अगर बुजुर्ग नहीं तो बच्चों की कहानियां बेजान है 
ख्याल, आदर-सम्मान को करने लगे नजर अंदाज अब क्यों  
क्या जिंदगी आधुनिक हो गई
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